गाय का चारा, वरदान कैसे?

गाय का चारा, वरदान कैसे?
किसिने किसीसे एक प्रश्न किया, क्या गायको चारा देने से हमे उद्योग (नौकरी)वगैरा मिल्ति है तो वो कैसे, क्या चारा खाया गाय, अपने पेट भरने वालेकि बैयोडाटा (biodata)लेकर कारखानोंको जाके उस चारा दिया आदमीका सिफारस् करेगा? (it’s a wrong number).
एैसे बेबुनाद सवाल करने वालेसे, मेरा एक प्रश्न है, क्या गाय का मांस खानेवाले को नौकरी वगैरा मिलेगा, क्या जानवर जैसे व्यक्तित्व वाले मनुष्य जो गाय को काटके भरपेट उसका मांस खालिया, क्या उसे नौकरी मिलसक्ती है? क्या मरा हुआ गाय मरनेके बाद भगवानके पास जाके अपने को खाया हुआ आदमी की तरक्कि केलिये प्रार्थना करेगा? अगर कोइ इस विषयको मानते हैं तो उस्से बडामूर्ख समग्र विश्वमे कोई नहि है. अरे! सोचो, जैसे हर मनुष्य को उसकी प्राण बेहत पसंद है, वैसेहि हर प्राणिकोभी अपने प्राण बेहत पसंद है, मरा हुआ प्राणी(गाय), भगवान् के पास जाके अपनि मृत्यु का कारण जो भी व्यक्ति है, उसके खिलाफ शिकायत करेगा नाकि सिफारस.
अगर गाय को चारा दिये तो वह प्राणी जो अपना देखबाल खुद नही करसकता, वह दूसरे को कैसे हित करेगा? इस प्रश्न का समाधान महाभारत हमे देता है.
ग्रासमुष्टिं परगवे दद्यात् संवत्सरं शुचिः ।
अकृत्वा स्वयमाहारं व्रतं तत् सार्वकामिकम्॥
भावार्थ- अगर कोइी व्यक्ति शुचिसे शुद्ध रहकर उपवास रहके (अपने भोजन से पहले) एक साल तक अगर नियमित रूपसे एक गायको थोडासा चारा दे, तो उस मनुष्य के सारे मनोरथ पूर्ण होजाते हैं, अर्थात स्वयं गोपाल भगवान श्री कृष्ण उस गायको चारा देनेसे प्रसन्न होके चारादेने वाले मनुष्यकि सारि मनोरथ स्वयं पूर्ण करेंगे.
गाय को चारादेना (wrong number) नहि सही नंबर है. मनुष्य के द्वारा अनुष्ठित गोरक्षा आदि सत्कर्मों से प्रसन्न हुवे भगवान यथार्थ रूपमे फलदाता है.

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